आकाशवाणी.इन
विशेष संवाददाता
कोरबा, 16 अक्टूबर 2026/ राजस्व पटवारी संघ छत्तीसगढ़ के आह्वान पर 13 अक्टूबर से शुरू हुई अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर कोरबा जिले में व्यापक रूप से देखने को मिल रहा है। ‘PV ऐप’ (फसल भौतिक सत्यापन ऐप) की तकनीकी और व्यावहारिक खामियों को लेकर आंदोलन कर रहे पटवारियों को अब राजनीतिक दलों का भी खुला साथ मिलने लगा है। इसी कड़ी में आम आदमी पार्टी (AAP) के कोरबा जिला अध्यक्ष रिचर्ड डेविड लोगन ने अपने कार्यकर्ताओं के साथ पटवारियों के धरना स्थल पहुंचकर इस आंदोलन को अपना पूर्ण और आधिकारिक समर्थन दिया.
जायज मांगों के लिए सड़क पर उतरना सरकार की नाकामी: रिचर्ड डेविड लोगन
पटवारियों को संबोधित करते हुए आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष रिचर्ड डेविड लोगन ने कहा कि बिना बुनियादी ढांचा, उचित प्रशिक्षण और पर्याप्त संसाधन दिए पटवारियों पर पीवी ऐप के माध्यम से अत्यधिक दबाव बनाना पूरी तरह से अव्यावहारिक है। सुदूर वनांचल क्षेत्रों में नेटवर्क की भारी समस्या है, इसके बावजूद प्रशासन द्वारा तय समय सीमा के भीतर काम पूरा करने का दबाव बनाया जा रहा है, जो कर्मचारियों के मानसिक उत्पीड़न जैसा है.
उन्होंने आगे कहा कि पटवारी संघ ने अपनी समस्याओं को लेकर पूर्व में कई बार ज्ञापन सौंपकर विभाग को अवगत कराया था। इसके बावजूद आज पर्यंत कोई ठोस समाधान न करना और समस्याओं को अनसुना करना अत्यंत खेदजनक है। आम आदमी पार्टी पटवारियों की इस लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है.

दंडात्मक कार्रवाई का विरोध, पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग
धरना प्रदर्शन के दौरान पटवारी संघ के पदाधिकारियों ने जिला प्रशासन और शासन की हठधर्मिता पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। कोरबा में भी पटवारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक विभिन्न जिलों में की गई निलंबन व स्थानांतरण जैसी दंडात्मक कार्रवाइयां वापस नहीं ली जातीं और ऐप की अनिवार्य व्यवस्था को बंद कर भुइयां पोर्टल जैसी व्यावहारिक व्यवस्था बहाल नहीं की जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.
आम जनता और किसानों की बढ़ी मुश्किलें
जिले में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से कामकाज पूरी तरह ठप्प हो गया है। धान खरीदी के लिए अनिवार्य फसल गिरदावरी, एग्रीस्टैक पंजीयन, नक्शा बटांकन और नामांतरण जैसे अति-आवश्यक काम रुक गए हैं। आम आदमी पार्टी ने शासन से मांग की है कि हठधर्मिता छोड़कर तत्काल वार्ता के माध्यम से पटवारियों की तकनीकी और वेतन विसंगति संबंधी मांगों का निराकरण किया जाए, ताकि किसानों और आम जनता को हो रही दिक्कतों से राहत मिल सके.