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👉कोरबा व कटघोरा प्रदाय केन्द्र में अफरा-तफरी, दूसरे जिले के कर्मी की आईडी-पासवर्ड का उपयोग कर चावल का लॉट स्वीकारा
👉 जिम्मेदार अधिकारियों ने खेला फर्जीवाड़ा का बड़ा खेल,मिलरों की भूमिका सवालों में.
रायपुर/कोरबा। छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के कोरबा स्थित गोदाम में मिलर्स से मिले सीएमआर के हजारों क्विंटल चावल घटिया स्तर के पाए गए। कस्टम मिलिंग का चावल लेने के मामले में भारी गड़बड़ी और भ्रष्टाचार उजागर हुआ है। नान मुख्यालय के जांच दल ने गुणवत्ता निरीक्षण के बाद अपनी रिपोर्ट में खुद इसका खुलासा किया है। अफरा-तफरी के इस मामले में जवाबदेह आला अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की बजाय लीपापोती कर बचाने की कवायद चल रही है। जिला प्रबंधक समेत अन्य अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं.
पहले यह बता दें कि कस्टम मिल्ड राइस (CMR) वह चावल है, जिसे राइस मिलर्स सरकारी एमएसपी (MSP) (समर्थन मूल्य) पर उपार्जन केंद्रों में किसानों से खरीदे गए धान को उठाव के बाद कुटाई करके चावल तैयार करते हैं। इस प्रक्रिया में, मिलर्स को धान के बदले में शासन द्वारा निर्धारित प्रतिशत के बराबर चावल, एफसीआई (FCI) या संबंधित सरकारी एजेंसी (जैसे मार्कफेड) को राशन वितरण के लिए वापस करना होता है। यह चावल शासकीय उचित मूल्य की दुकानों से राशन कार्डधारियों को वितरण किया जाता है.
खेल का कुछ इस तरह हुआ खुलासा
दरअसल, नान मुख्यालय के जांच दल ने कोरबा और कटघोरा जिले के प्रदाय केन्द्र गोदामों का निरीक्षण करने के बाद अपनी जांच रिपोर्ट में ही चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं। सूत्रों के मुताबिक, जांच रिपोर्ट में स्वीकार किया गया है कि अन्य जिले के कनिष्ठ तकनीकी सहायक के आईडी, पासवर्ड और ओटीपी का उपयोग कर चावल लॉट स्वीकार किया गया है, जबकि लॉट जब स्वीकृत किया गया तो कोरबा प्रदाय केन्द्र में स्वीकृतकर्ता भौतिक रूप से मौजूद ही नहीं थे। इसी तरह का फर्जीवाड़ा विभिन्न तकनीकी सहायक स्तर के कर्मचारियों के जरिए किया गया। इसमें पूर्व प्लेसमेंट कर्मचारी प्रकाश बरेठ के नाम का भी जिक्र किया गया है, जिसे अन्य जिले में पदस्थ तकनीकी सहायकों के आईडी, पासवर्ड का उपयोग कर सर्वर लॉगिन करने और ओटीपी शेयर करने का भी उल्लेख है। पूर्व प्लसेमेंट कर्मचारी द्वारा चावल के लॉट को अन्य जिले के तकनीकी सहायकों द्वारा स्वीकार करने की बात कही गई है। जबकि नान मुख्यालय के निर्देशों के तहत ओटीपी, पासवर्ड शेयर करना प्रतिबंधित किया गया है। इस मामले में आठ तकनीकी सहायक स्तर के कर्मचारियों को जारी नोटिस के साथ कहा गया है कि अलग-अलग लॉटों के विभिन्न स्टैंक में रखे चावल प्रथम दृष्टया ही घटिया स्तर के पाए गए हैं.
आईडी कोरबा कैसे स्थानांतरित हुई?
बेमेतरा जिले के एक कर्मचारी महेश्वर लाल सोनवानी की आईडी कोरबा कैसे स्थानांतिरत हुई इस पर भी सवाल उठ रहे हैं जबकि संबंधित कर्मचारी को वहां के जिम्मेदार आला अफसर ने बेमेतरा में ही रोके रखा। पूरे मामले में नान मुख्यालय के कुछ अफसरों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। इस पूरी अफरा-तफरी को सुनियोजित ढंग से अंजाम दिया गया। इसी तरह अन्य जिलों के तकनीकी कर्मियों की आईडी भी कोरबा स्थानांतरित कर दी गई.
यह सवाल भी उठ रहे हैं
कोरबा में भौतिक रूप से गैरमौजूद तकनीकी कर्मियों की आईडी से कागजी कार्रवाई होती रही तब जिला प्रबंधक समेत अन्य अफसरों ने नजरअंदाज क्यों किया..? अन्य जिलों में छोटे कर्मचारियों ने आला अफसरों के आदेश पर अवैधानिक गतिविधियां की तो जिला प्रबंधकों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई? जाहिर है कि विभिन्न जिलों के जिला प्रबंधकों से मिलकर कोरबा में धड़ल्ले से घटिया चावल की खरीदी कर ली गई और अब घटिया चावल खपाने की अंदरूनी कवायद चल रही है.
गुणवत्ता से समझौता नहींः अध्यक्ष
छग राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव का कहना है कि चावल की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं करेंगे। शुरूआती जांच के बाद प्रथम दृष्टया कार्रवाई की गई है। गुणवत्ता निरीक्षक समेत अन्य लोगों को निलंबित और कारण बताओ नोटिस दिया गया है। विस्तृत जांच चल रही है। रिपोर्ट आने के बाद दोषी आला अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा.