Home छत्तीसगढ़ नियमों की अनदेखी कर शिक्षक को बना दिया सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी

नियमों की अनदेखी कर शिक्षक को बना दिया सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी

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आकाशवाणी.इन

जांजगीर चांपा, 29 अप्रैल 2026/ जिले के शिक्षा विभाग में एक बार फिर प्रशासनिक अनियमितताओं और मनमानी का मामला सामने आया है। जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) द्वारा जारी एक आदेश ने पूरे तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नियम कायदों को दरकिनार करते हुए शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला अमोरा में पदस्थ शिक्षक संजय सिंह राठौर को जिले के बम्हनीडीह विकासखंड का सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी (एबीईओ) बना दिया गया है.
कार्यालय जांजगीर-चांपा से जारी आदेश क्रमांक 2168/स्था.02/2026-27, दिनांक 28.04.2026 के अनुसार, शिक्षक संजय सिंह राठौर को विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय बम्हनीडीह में सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी के रिक्त पद पर पदस्थ किया गया है। आदेश में स्पष्ट रूप से उन्हें उक्त दायित्व सौंपने की बात कही गई है। जानकारों के अनुसार, विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) एवं सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी (एबीईओ) जैसे पदों पर नियुक्ति राज्य शासन स्तर से की जाती है। जिला स्तर के अधिकारी को इस प्रकार की सीधी नियुक्ति या पदस्थापना का अधिकार नहीं होता। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर किस आधार पर एक स्कूल में पदस्थ शिक्षक को सीधे ब्लॉक स्तर के प्रशासनिक पद पर बैठा दिया गया? इस पूरे मामले को और गंभीर बनाता है एक और तथ्य, जिसके मुताबिक विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय बलौदा मेंराज्य शासन के आदेश से पदस्थ सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्रीमती पुष्पा कोरी दिवाकर को लंबे समय से जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय जांजगीर-चांपा में संलग्न (अटैच) कर रखा गया है। इस कारण बलौदा ब्लॉक का शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहा है तो वहीं दूसरी ओर बम्हनीडीह में नए तरीके से नियुक्ति कर दी गई। यह दोहरी व्यवस्था सीधे-सीधे प्रशासनिक अव्यवस्था को दर्शाती है.

प्रशासनिक कार्य पर पड़ रहा व्यापक असर
विशेषज्ञों का मानना है कि ब्लॉक स्तर पर एबीईओ का पद अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। योजनाओं के क्रियान्वयन, निरीक्षण और मॉनिटरिंग में इसकी बड़ी भूमिका होती है। यदि पदस्थापन नियमों के विपरीत होगा तो शिक्षा व्यवस्था पर सीधा असर पड़ेगा। इधर, बलौदा में अधिकारी की अनुपस्थिति और बम्हनीडीह में विवादित नियुक्ति दोनों मिलकर जिले की शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं.
शासन के आदेशों की खुली अवहेलना
पूरा मामला इस और इशारा करता है कि जिला स्तर पर बैठे अधिकारी द्वारा शासन के स्पष्ट दिशा-निर्देशों की अनदेखी की जा रही है। राज्य स्तर से नियुक्त अधिकारी को हटाकर अटैच करना और दूसरी और बिना प्र िया के नई नियुक्ति करना, यह प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इस पूरे मामले को लेकर अब शिक्षा विभाग के अंदर और बाहर दोनों जगह चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो, नियम विरुद्ध आदेश को निरस्त किया जाए एवं जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो.

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