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इंसान और वन्यजीवों के बीच सह-अस्तित्व की अनूठी मिसाल: कोरबा के साजापानी में ग्रामीणों ने मनाई नन्हे हाथी की छठी, रखा ‘काशी’ नाम

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आकाशवाणी.इन

साजापानी से रविशंकर की रिपोर्ट

कोरबा, 26 अक्टूबर 2026/ छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से मानव-हाथी संघर्ष के बीच प्रेम और संवेदना की एक बेहद खूबसूरत व ऐतिहासिक खबर सामने आई है। करतला वन परिक्षेत्र के लबेद बीट अंतर्गत ग्राम साजापानी में हाथियों के झुंड में जन्मे एक नन्हे शावक के स्वागत में ग्रामीणों ने अनोखा जश्न मनाया। पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए ग्रामीणों ने न केवल नन्हे मेहमान की छठी का उत्सव मनाया, बल्कि उसका नामकरण करते हुए उसका नाम ‘काशी’ रखा है.

 

वनक्षेत्र में गूंजी थी किलकारी, ग्रामीणों ने छपवाए निमंत्रण पत्र

दरअसल, 20 अक्टूबर की सुबह साजापानी जंगल में प्रसिद्ध काशीरानी मंदिर के निकट एक हथिनी ने बच्चे को जन्म दिया था। जब वन विभाग की गश्त टीम और ग्रामीणों को इसकी जानकारी मिली, तो पूरे इलाके में कौतूहल और खुशी का माहौल बन गया। आमतौर पर हाथियों की मौजूदगी से डरने वाले ग्रामीणों ने इस बार एक नई शुरुआत की। उन्होंने आपसी सहमति बनाकर यह तय किया कि वे इस नन्हे शावक का स्वागत अपने परिवार के बच्चे की तरह करेंगे। इस ऐतिहासिक उत्सव के लिए बाकायदा डिजिटल और पारंपरिक निमंत्रण कार्ड छपवाकर आसपास के सात गांवों, जनप्रतिनिधियों और वन विभाग के अधिकारियों को आमंत्रित किया गया था.

धूमधाम से हुआ नामकरण और भंडारा

रविवार, 25 अक्टूबर को गांव के मंदिर परिसर में छठी का मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। उत्सव का माहौल ऐसा था मानो पूरे गांव में कोई बड़ा त्योहार हो. गांव की महिलाओं और पुरुषों ने पारंपरिक गीतों के बीच पूजा-अर्चना करते हुए नामकरण की परंपरा निभाई और काशीरानी मंदिर के पास जन्म लेने के कारण सर्वसम्मति से नन्हे हाथी का नाम ‘काशी’ रखा गया.

इस उत्सव के अवसर पर भव्य भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें साजापानी समेत आसपास के सात गांवों से हजारों की संख्या में ग्रामीण शामिल हुए और प्रसाद ग्रहण किया.
इस दौरान ग्रामीणों ने कहा “हाथी” हमारे जंगल की शान हैं, इनका संरक्षण हमारा कर्तव्य है, इस दौरान पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के नारे भी लगाए गए.

वन विभाग ने की ग्रामीणों की सराहना

इस अनोखे और भावुक कर देने वाले आयोजन में वनमंडल के एसडीओ मणिकांत वर्मा सहित वन विभाग की टीम भी मौजूद रही। अधिकारियों ने ग्रामीणों की इस अनूठी पहल की मुक्त कंठ से सराहना की है। वन विभाग का मानना है कि मानव-हाथी द्वंद्व (संघर्ष) के इस दौर में ग्रामीणों का यह कदम समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगा। वर्तमान में वन विभाग ड्रोन कैमरों के जरिए सुरक्षित दूरी से जच्चा-बच्चा और पूरे दल की सुरक्षा व गतिविधियों पर लगातार निगरानी रख रहा है.

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