आकाशवाणी.इन
कोरबा, 30 अक्टूबर 2026/ जिले के वार्ड क्रमांक 51 डांडपारा और ग्राम पंचायत नवागांव कला सहित विभिन्न ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों से श्रमिकों को मालवाहक वाहनों (जैसे पिकअप, छोटा हाथी, ट्रैक्टर और मेटाडोर) में भेड़-बकरियों की तरह ठूंस-ठूंस कर ले जाने का जानलेवा सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। उपनगरीय दर्री क्षेत्र से भी एक नया वीडियो सामने आया है। इस नए वीडियो ने साफ कर दिया है कि श्रमिकों की सुरक्षा से खिलवाड़ का यह खेल केवल एक-दो वार्डों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे जिले के विभिन्न औद्योगिक व ग्रामीण क्षेत्रों में धड़ल्ले से फैल चुका है.
इस संवेदनशील और जानलेवा लापरवाही को लेकर आकाशवाणी.इन द्वारा लगातार प्रमुखता से खबरें प्रसारित की जा रही हैं, जिसके बाद यह मुद्दा सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। हैरानी की बात यह है कि मीडिया द्वारा लगातार आगाह किए जाने और लगातार खबरें सामने आने के बावजूद भी स्थानीय प्रशासन, परिवहन विभाग और संबंधित जिम्मेदार अधिकारी गहरी नींद में सोए हुए हैं। अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है.
नियम ताक पर, हादसों को खुला निमंत्रण
यातायात नियमों के अनुसार, मालवाहक वाहनों का उपयोग केवल सामान ढोने के लिए किया जा सकता है, इंसानों या मजदूरों के परिवहन के लिए नहीं। लेकिन कोरबा जिले में ठेकेदारों और नियोक्ताओं द्वारा चंद रुपये बचाने के चक्कर में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। क्षमता से चार गुना अधिक मजदूरों को गाड़ियों में पीछे खड़ा कर या बैठाकर ले जाया जाता है। सड़कों के खराब होने या तेज रफ्तार के कारण जरा सा संतुलन बिगड़ने पर कोई भी बड़ी दुर्घटना घट सकती है.
आकाशवाणी.इन लगातार कर रहा लापरवाही उजागर
आकाशवाणी.इन लगातार अपनी रिपोर्टिंग के जरिए इस गंभीर लापरवाही को उजागर कर जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान इस ओर आकर्षित करने का प्रयास कर रहा है। जनता के बीच यह खबर चर्चा का विषय बनी हुई है, लेकिन ‘जिम्मेदार’ कुंभकर्णी नींद में हैं। प्रशासन की यह निष्क्रियता न सिर्फ प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाती है, बल्कि उन गरीब मजदूरों की जिंदगी की कीमत को भी कमतर आंकती है जो दो वक्त की रोटी के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर इन वाहनों में सफर करने को मजबूर हैं.
उठ रहे हैं गंभीर सवाल
लगातार खबरें वायरल होने के बाद भी परिवहन विभाग (RTO) और स्थानीय पुलिस ने इन वाहनों की चेकिंग क्यों नहीं?
नियमों का उल्लंघन करने वाले ठेकेदारों और वाहन मालिकों पर अब तक दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
क्या प्रशासन किसी बड़े और दर्दनाक हादसे के बाद ही जागेगा?
27 अक्टूबर का वीडियो
स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध जनों ने मांग की है कि कलेक्टर और पुलिस प्रशासन को तत्काल इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए। वार्ड 51, नवागांव कला और आसपास के रूटों पर चलने वाले ऐसे अवैध सवारी और मालवाहक वाहनों पर तत्काल जब्ती व जुर्माने की कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि गरीब मजदूरों की जान सुरक्षित रह सके.







