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KORBA : बीकानेर और राउरकेला एक्सप्रेस पटरी पर नही फाइलों में ही छुक छुक कर तोड़ रही दम…

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आकाशवाणी.इन

कोरबा,14 जनवरी 2026/ भले ही अमृत भारत स्टेशन के अंतर्गत रेलवे ने कोरबा को शामिल किया है और 49 करोड़ खर्च से कई प्रकार के काम कराए जा रहे हैं। इन सबके बावजूद असली सवाल कायम है कि लंबी दूरी की ट्रेन कब चलेगी, कुछ कह नही सकते। कोरबा से राउरकेला और उत्तर भारत में बीकानेर तक एक्सप्रेस चलाने के प्रस्ताव स्थानीय संगठन की ओर से भेजे गए। नेतृत्व की उदासीनता के कारण इस मामले में आगे कोई प्रगति नहीं हो सकी.

ऐसा ना हो कि ये दोनों गाडिय़ां फाइलों के गर्भ में ही दम तोड़ दे, रेल संघर्ष समिति द्वारा कोरबा क्षेत्र में ट्रेन यात्री सुविधाओं के विस्तार को लेकर पिछले दशक से गंभीर कोशिश की जा रही है। इसके अच्छे परिणाम कुछ मामलों में सामने आए। कोरबा और गेवरा रोड़ से यात्री गाडिय़ों के विस्तार के साथ स्टेशन में सुविधाओं में बढ़ोत्तरी इसी दबाव का नतीजा रही जबकि कई मुद्दों पर डीआरएम से लेकर जोन और रेल मंत्रालय तक उसके ठोक पत्राचार बताते हैं कि क्षमता से भी कहीं ज्यादा काम इस मामले में किया जा रहा है। रेल संघर्ष समिति ने बीते वर्षों में कोरबा जिले के लोगों को कोलकाता के तरफ सीधा कनेक्शन देने कोरबा से राउरकेला और कोरबा से बीकानेर के लिए एक्सप्रेस ट्रेन संचालन की मांग की थी। इसके पीछे पर्याप्त आधार दिए गए और रेलवे अधिकारियों को बताया गया कि ऐसा करने के लिए उसे न तो अतिरिक्त कोच की जरूरत होगी और न ही ज्यादा कुछ करना होगा.

क्योंकि बिलासपुर रेल मंडल में ऐसी कई गाडिय़ां चल रहीं हैं जो स्टेशन में खड़ी रहती है जिन्हें कोरबा तक विस्तारित करना आसान होगा। समिति ने पूरे मामले में पर्याप्त आधार देने के साथ बताया कि अगर ऐसी कोशिश होती है तो न केवल यात्रियों को सुविधाएं होंगी बल्कि रेलवे को औसत से कहीं ज्यादा राजस्व मिल सकेगा। कोरबा से किए गए पत्राचार पर ओडि़सा और राजस्थान के सांसदों ने न केवल रूचि ली बल्कि अपनी ओर से रेल मंत्रालय को पत्र लिखकर इसका समर्थन किया, लेकिन कोरबा जिले से जनप्रतिनिधियों के स्तर पर जो काम होना था उसमें कमी रह गई। लंबा अरसा गुजरने के साथ कोरबा जिले के दौरे पर आए जोन अध्यक्ष से लेकर डीआरएम ने इन मामलों पर बात जरूर की लेकिन ठोस आश्वासन नहीं दिया। वैसे भी रेलवे पर लगातार कोरबा की उपेक्षा करने के आरोप लगते रहे हैं। लोगों के दावे सही साबित हो रहे हैं कि रेलवे को कोरबा से केवल कोयला लदान ही करना है बाकी चीजें उसके लिए गौण है.

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