Home कोरबा न्यूज़ विशिष्ट’ मेहमानों की जगह ‘विशिष्ट’ मवेशियों का कब्जा: HTPP गेस्ट हाउस बना...

विशिष्ट’ मेहमानों की जगह ‘विशिष्ट’ मवेशियों का कब्जा: HTPP गेस्ट हाउस बना सर्वसुविधायुक्त ‘गौ-शरण स्थली’

11
0

आकाशवाणी.इन

कोरबा। एचटीपीपी (हसदेव ताप विद्युत परियोजना) प्रबंधन की कार्यकुशलता और ‘अतिथि देवो भव:’ की अनूठी परंपरा का एक जीता-जागता उदाहरण इन दिनों विभाग के विशिष्ट अतिथि गृह (VIP Guest House) के मुख्य द्वार पर देखने को मिल रहा है। प्रबंधन ने यहां आने वाले इंसानी वीआईपी मेहमानों की जगह, चार पैरों वाले ‘परम विशिष्ट’ आवारा मवेशियों को बिना किसी प्री-बुकिंग के ठहरने की वीआईपी सुविधा दे दी है।अब हालत यह है कि मुख्य द्वार पर मवेशियों का ऐसा अभेद्य सुरक्षा घेरा और डेरा रहता है, जिसे भेदकर अंदर जाना किसी आम या खास इंसान के बस की बात नहीं रही। मुख्य द्वार पर ‘गार्ड ऑफ ऑनर’विशिष्ट अतिथि गृह के चमचमाते गेट के ठीक सामने एक दर्जन से अधिक गाएं और सांड बकायदा कतारबद्ध होकर बैठते हैं। इसे देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो वे यहां आने वाले अधिकारियों को अपनी भाषा में ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दे रहे हों। मवेशियों के इस मुफ्त और स्थाई ‘डेरे’ से ऐसा लगता है कि प्रबंधन ने अंदर के कमरों में एयर कंडीशनर कम पड़ने की स्थिति में, बाहर ही प्राकृतिक ‘ओपन-एयर लाउंज’ की व्यवस्था कर दी है।गोबर से सजी ‘ग्रीन कारपेट’अतिथि गृह की सड़कों और प्रवेश द्वार को स्वागत योग्य बनाने के लिए किसी कृत्रिम कालीन (कारपेट) की जरूरत नहीं पड़ी है। मवेशियों ने अपनी विशेष कलाकृति (गोबर) से पूरे रास्ते को ‘नेचुरल ग्रीन कारपेट’ का लुक दे रखा है। यहां आने वाले मेहमानों को गाड़ी से उतरते ही अपनी एकाग्रता और संतुलन का परिचय देना पड़ता है, ताकि पैर सीधे इसी ‘प्राकृतिक कालीन’ पर न पड़े।प्रशासनिक मौन या मवेशियों से डर?इस अभूतपूर्व नजारे को देखकर क्षेत्र के लोग और राहगीर प्रबंधन की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। लोगों का कहना है कि शहर में भले ही ‘रोको-टोको’ अभियान और ‘गौठान’ की फाइलें धूल खा रही हों, लेकिन एचटीपीपी प्रबंधन ने वीआईपी गेस्ट हाउस को ही ‘हाई-टेक गौठान’ में तब्दील कर अपनी दूरदर्शिता का परिचय दिया है। जिम्मेदार अधिकारी इस रास्ते से दिन में कई बार गुजरते हैं, लेकिन वे मवेशियों के इस शांतिपूर्ण धरने और डेरे में खलल डालकर पुण्य के भागीदार नहीं बनना चाहते।संदेश साफ़ है: जब तक वीआईपी गेस्ट हाउस के गेट पर यह ‘मवेशी राज’ कायम रहेगा, तब तक आम जनता को यह समझने में जरा भी देर नहीं लगेगी कि सिस्टम किस कदर गहरी नींद में सो रहा है। अब देखना यह है कि प्रबंधन की नींद कब टूटती है या फिर मवेशी खुद ही बोर होकर अपना नया ठिकाना ढूंढ लेते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here