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EXCLUSIVE: दो शराबियों के ‘ड्रिंक एंड ड्राइव’ ने उजाड़ा हंसता-खेलता परिवार; 16 वर्षीय मनीष की मौत के बाद कब्र से लिपटकर रो पड़े सारे यार, कोरबा से आकाशवाणी.इन की ग्राउंड रिपोर्ट

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आकाशवाणी.इन

कोरबा। डिजिटल दुनिया में हर सेकंड हजारों वीडियो वायरल होते हैं, लेकिन कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो कैमरे की चकाचौंध से दूर, खामोशी से इंसानी जज्बातों की सबसे ऊंची मिसाल और समाज की कड़वी हकीकत लिख देती हैं। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत नवा गाँव कला (झाबु डैम क्षेत्र) से एक ऐसी ही दिल को झकझोर देने वाली दास्तान सामने आई है। यह एक ऐसी खबर है जो सोशल मीडिया पर अब तक वायरल नहीं हुई है, जिसे आकाशवाणी.इन न्यूज़ की टीम ने ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर दुनिया के सामने लाया है।”दोस्त से इस कदर प्यार… दफनाने के बाद कब्र पर लेट गए सभी यार।” यह महज़ कोई शायरी नहीं, बल्कि नवा गाँव कला के मुक्तिधाम में पसरी वह हकीकत है, जिसने वहां मौजूद हर शख्स की रूह को कंपा दिया। लेकिन इस बेहद भावुक वाकये के पीछे छिपा है कानून को ठेंगा दिखाने वाला एक घिनौना सच.

👉शराब के नशे में चूर दो युवकों ने मासूम को रौंदा, बुझ गया इकलौता चिराग

कहानी शुरू होती है 3 सितंबर की रात एक दर्दनाक सड़क हादसे से, जो किसी इत्तेफाक का नतीजा नहीं, बल्कि सीधे तौर पर एक अपराध था। ग्राम पंचायत नवा गाँव कला (झाबु) का रहने वाला मात्र 16 वर्षीय किशोर मनीष गिरी गोस्वामी अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। अभी तो मनीष ने जिंदगी की दहलीज़ पर कदम ही रखा था। वह अपने माता-पिता के बुढ़ापे की लाठी और उनके सुनहरे सपनों का एकमात्र आधार था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मुख्य मार्ग पर सामने से आ रहे एक तेज रफ्तार वाहन में सवार दो शराबी पूरी तरह नशे में धुत थे। ‘ड्रिंक एंड ड्राइव’ (Drink and Drive) के इस जानलेवा खेल में नशेड़ियों ने वाहन पर से अपना नियंत्रण खो दिया और सीधे मनीष की गाड़ी को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी भीषण थी कि 16 साल के बेकसूर “मनीष” घर का इकलौता चिराग हमेशा के लिए बुझ गया। नशेड़ियों के इस गैर-जिम्मेदाराना कृत्य ने हंसते-खेलते गोस्वामी परिवार को कभी न खत्म होने वाले अंधेरे में धकेल दिया है.

👉अंतिम विदाई में जब टूट गया हमउम्र दोस्तों के सब्र का बांध

जब 16 साल के मनीष की पार्थिव देह को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया, तो पूरे गांव की आंखें नम थीं। लेकिन असली मर्मस्पर्शी और हैरान कर देने वाला नजारा तब देखने को मिला जब मनीष के पार्थिव शरीर को दफनाया गया। जब अंतिम संस्कार की रस्में पूरी हो गईं और बड़े-बुजुर्ग धीरे-धीरे अपने घरों की तरफ लौटने लगे, तब मनीष के जिगरी हमउम्र दोस्तों का सब्र पूरी तरह टूट गया। अपने सबसे प्यारे दोस्त को इतनी कम उम्र में मिट्टी के नीचे हमेशा के लिए सोता देख, उसके दोस्त खुद को संभाल नहीं पाए। रोते-बिलखते और चीखते हुए वे सभी यार मनीष की ताजा गीली कब्र पर ही लेट गए। वे मिट्टी को सीने से लगाकर अपने भाई जैसे दोस्त को आवाज दे रहे थे और कह रहे थे कि ‘हमें इन कातिलों के भरोसे अकेला छोड़कर क्यों चले गए.

👉कैमरे में कैद हुआ ‘अनकहा और अनसुना’ दर्द:

आकाशवाणी.इन की खास पेशकश: आज के दौर में जहां रिश्तों पर स्वार्थ हावी है, वहीं कोरबा जिले के नवा गाँव कला की मिट्टी गवाह बनी एक ऐसे निस्वार्थ याराने की, जो मौत की लकीर को भी लांघ गया। आकाशवाणी.इन न्यूज़ इस मर्मस्पर्शी सच्चाई को दुनिया के सामने लेकर आया है। यह खबर इंटरनेट पर ट्रेंड होने वाले किसी सतही वीडियो जैसी नहीं है, बल्कि यह इंसानी मोहब्बत, जुदाई के गहरे दर्द और उस वफादारी की जीती-जागती मिसाल है जो सिर्फ सच्चे दोस्त ही एक-दूसरे के लिए महसूस कर सकते हैं। नशे में धुत उन दो अपराधियों ने मनीष को तो छीन लिया, लेकिन मनीष अपने पीछे दोस्तों की जो फौज छोड़ गया, उसने साबित कर दिया कि यादें कभी दफन नहीं होतीं। स्थानीय ग्रामीणों ने अब प्रशासन से ‘ड्रिंक एंड ड्राइव’ करने वाले दोनों आरोपियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा चलाने और क्षेत्र में सख्त चेकिंग लगाने की मांग की है.

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