कोरबा, 19सितम्बर 2026/माननीय उच्चतम न्यायालय के रिट पिटीशन (सिविल) क्रमांक 1404/2023, सुकन्या संस्था विरुद्ध यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य में 3 अक्टूबर 2024 को पारित निर्णय के दिशा-निर्देशों के तहत बंदियों के मौलिक अधिकारों की रक्षा और न्याय तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उपजेल कटघोरा का सघन निरीक्षण किया गया। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोरबा श्रीमती नीता यादव की अध्यक्षता में डिस्ट्रिक्ट जेल विजिटर्स बोर्ड ने जेल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया.
निरीक्षण के दौरान जेल में निरुद्ध कैदियों को उपलब्ध कराई जा रही मूलभूत सुविधाओं, स्वास्थ्य सेवाओं, भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता व्यवस्था और विधिक सहायता की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई। बोर्ड के सदस्यों ने जेल परिसर के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण करते हुए कैदियों के बैरक, रसोईघर, स्वास्थ्य केंद्र तथा अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी ली.
जेल में बंदियों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता और पोषण संबंधी मानकों का भी आकलन किया गया। इसके साथ ही स्वास्थ्य केंद्र में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, आवश्यक दवाइयों, चिकित्सकों की उपलब्धता तथा बंदियों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था की समीक्षा की गई। निरीक्षण के दौरान कैदियों के लिए संचालित शिक्षा कार्यक्रमों और खेलकूद जैसी गतिविधियों की जानकारी भी ली गई.
निरीक्षण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा जेल लीगल एड क्लीनिक की कार्यप्रणाली की समीक्षा रहा। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने के लिए जानकारी ली कि जेल में निरुद्ध बंदियों को समय पर और सरल तरीके से निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध हो रही है या नहीं। बंदियों को अधिवक्ता नियुक्ति, निःशुल्क विधिक सहायता तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की विभिन्न योजनाओं के संबंध में भी जानकारी दी गई.
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती नीता यादव ने जेल अधीक्षक और संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि बंदियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण, पौष्टिक भोजन, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण तथा आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं बिना किसी व्यवधान के उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने जेल में विधिक सहायता की व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने तथा जरूरतमंद बंदियों तक इसका लाभ पहुंचाने पर विशेष जोर दिया.
इस दौरान आयोजित संक्षिप्त विधिक जागरूकता शिविर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से बंदियों को संबोधित करते हुए कहा गया कि वे स्वयं को असहाय न समझें। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जरूरतमंद बंदियों को आवश्यक कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए सदैव तत्पर है। बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों और उपलब्ध विधिक सेवाओं के प्रति जागरूक करने के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए.
निरीक्षण के दौरान प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोरबा, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोरबा, सुश्री मयूरा गुप्ता, विजय सिंह एसडीओपी कटघोरा, एससी पाण्डेय एसडीओ पीडब्ल्यूडी, डॉ. रश्मि, सहायक जेल अधीक्षक कटघोरा, फार्मासिस्ट, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव सहित जेल का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा.
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