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कोरबा, 28 सितंबर 2026/ हसदेव ताप विद्युत संयंत्र (एचटीपीएस) कोरबा पश्चिम के दूसरे चरण के विस्तार के तहत निर्माणाधीन 1320 मेगावाट के सुपर क्रिटिकल पावर प्लांट की दोनों इकाइयों को कोयले की निर्बाध आपूर्ति के लिए मैरी गो राउंड (एमजीआर) प्रणाली विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड के प्रोजेक्ट विभाग ने उद्योग विभाग से दर्री क्षेत्र में जमीन मांगी है। प्रस्तावित जमीन पर बंद पड़े कारखाने की भूमि में एमजीआर सिस्टम स्थापित किया जाएगा। उद्योग विभाग से अनुमति और जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद एमजीआर सिस्टम के निर्माण की दिशा में आगे की कार्रवाई शुरू होगी.
प्रस्तावित स्थल पावर प्लांट के नजदीक होने के कारण एमजीआर के माध्यम से संयंत्र तक कोयला पहुंचाने में सुविधा होगी। इसके साथ ही सड़क मार्ग से कोयला परिवहन कम होने से भारी वाहनों का दबाव और यातायात संबंधी समस्या भी कम होगी। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत रेलवे के माध्यम से कोयला दर्री क्षेत्र में बनाए जाने वाले नए एमजीआर रेल नेटवर्क तक पहुंचेगा। इसके बाद कोल हैंडलिंग प्लांट के जरिए कोयला पावर प्लांट तक पहुंचाया जाएगा.
एचटीपीएस विस्तार परियोजना की आधारशिला 30 मार्च 2025 को पर्यावरणीय स्वीकृति और टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद रखी गई थी। भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) को करीब 13,990 करोड़ रुपए की लागत से परियोजना का ठेका दिया गया है। परियोजना के तहत 660 मेगावाट की पहली इकाई को वर्ष 2029 तक उत्पादन में लाने का लक्ष्य है। दूसरी इकाई को भी इसके एक से दो वर्ष के भीतर शुरू करने की योजना है.
पहले एचटीपीएस विस्तार के लिए कोरबा पश्चिम की लेबर हॉट कॉलोनी क्षेत्र को चिन्हित किया गया था, लेकिन रहवासियों के विस्थापन को लेकर विरोध के बाद दर्री-जमनीपाली मुख्य मार्ग के किनारे स्थित लंबे समय से बंद पड़े कारखाने की जमीन को विकल्प के रूप में चुना गया। करीब 300 एकड़ भूमि उपलब्ध होने की स्थिति में यहां कोल हैंडलिंग प्लांट सहित एमजीआर से जुड़े अन्य निर्माण कार्य भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड द्वारा कराए जाएंगे। एमजीआर तक रेल नेटवर्क के विस्तार का काम राइट्स लिमिटेड द्वारा किया जाएगा.
रोड कम रेल (आरसीआर) मोड के माध्यम से दक्षिण पूर्वी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की खदानों से कोयला सुराकछार रेल साइडिंग तक पहुंचाया जा रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत इसी साइडिंग से नए एमजीआर रेल नेटवर्क के जरिए एचटीपीएस विस्तार परियोजना तक कोयला पहुंचाया जाएगा। वर्तमान में कुसमुंडा खदान से कन्वेयर बेल्ट के जरिए पुराने एचटीपीएस संयंत्र को कोयला आपूर्ति की जा रही है। विस्तार परियोजना के लिए करीब 65 लाख टन कोयले की वार्षिक आवश्यकता होगी। ऐसे में मौजूदा कन्वेयर बेल्ट से नए संयंत्र की पूरी जरूरत पूरी करना संभव नहीं होगा.
छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड की पुरानी 210 मेगावाट क्षमता वाली चार इकाइयों को वर्ष 2029 के बाद चरणबद्ध तरीके से बंद करने की तैयारी है। यदि इन इकाइयों के रिनोवेशन की अनुमति नहीं मिलती है तो अगले तीन से चार वर्षों में इनके संचालन पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर औद्योगिक विकास के साथ प्रदेश में बिजली की मांग हर वर्ष छह प्रतिशत से अधिक की दर से बढ़ रही है। पीक आवर में मांग के अनुरूप बिजली उपलब्ध कराने का दबाव भी उत्पादन कंपनी पर है। ऐसे में एचटीपीएस की 1320 मेगावाट विस्तार परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
कोरबा स्थित 2600 मेगावाट क्षमता के एनटीपीसी लिमिटेड के ताप विद्युत संयंत्र में भी एमजीआर प्रणाली के माध्यम से मालगाड़ियों से कोयला सीधे पावर प्लांट तक पहुंचाया जाता है। इस प्रणाली में समर्पित रेलवे नेटवर्क के जरिए कोयले की ढुलाई और आधुनिक तकनीक से तेजी से अनलोडिंग की जाती है। इसके बाद कोल हैंडलिंग प्लांट के माध्यम से कोयला संयंत्र तक पहुंचता है। एचटीपीएस विस्तार परियोजना में भी इसी तरह की व्यवस्था विकसित करने की योजना है.
एचटीपीएस के कार्यपालक निदेशक एवं मुख्य अभियंता एच.के. सिंह ने बताया कि प्रोजेक्ट विभाग ने एमजीआर सिस्टम के लिए उद्योग विभाग से जमीन की मांग की है। जमीन मिलने के बाद राइट्स लिमिटेड द्वारा रेल नेटवर्क विस्तार का सर्वे किया जाएगा। एमजीआर प्रणाली के तहत रेलवे यार्ड भी विकसित किया जाएगा, जबकि कोल हैंडलिंग प्लांट और अन्य आवश्यक निर्माण कार्य भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड द्वारा कराया जाएगा.