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अधूरे आवास को पूरा दिखाकर भुगतान का आरोप, बरकोन्हा में कथित फर्जी जियो टैगिंग से उठे सवाल

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आकाशवाणी.इन

कोरबा, 02 अक्टूबर 2026/ प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के क्रियान्वयन में कथित फर्जी जियो टैगिंग और भुगतान का एक और मामला सामने आया है। कोरबा जिले के करतला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बरकोन्हा में हितग्राही मंजू बाई राठिया, पति भागीरथी राठिया के नाम स्वीकृत प्रधानमंत्री आवास का निर्माण मौके पर अधूरा होने के बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में उसे पूर्ण दर्शाए जाने का आरोप लगाया गया है। आरोप है कि हितग्राही के वास्तविक आवास की जगह किसी अन्य आवास की तस्वीरों को जियो टैग कर पोर्टल पर अपलोड किया गया और इसके आधार पर आवास की पूरी राशि का भुगतान कर दिया गया.

जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 में मंजूर उक्त आवास के लिए हितग्राही के खाते में 4 दिसंबर 2025 को प्रथम किश्त के रूप में 40 हजार रुपये, 23 जनवरी 2026 को द्वितीय किश्त के रूप में 55 हजार रुपये तथा 23 जून 2026 को तृतीय किश्त के रूप में 25 हजार रुपये जारी किए गए। वहीं सरकारी पोर्टल पर 6 अप्रैल 2026 को आवास को पूर्ण दर्शाया गया है। शिकायत में दावा किया गया है कि वास्तविक स्थिति इसके विपरीत है और मौके पर निर्माण कार्य अभी भी अधूरा है.

मामले ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में जियो टैगिंग की प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि आवास मित्र, रोजगार सहायक, पंचायत सचिव सहित जनपद स्तर के संबंधित निगरानी तंत्र की कथित लापरवाही या मिलीभगत के चलते वास्तविक आवास की जगह दूसरे मकान की तस्वीरें जियो टैग की गईं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.

ग्रामीणों का कहना है कि यदि करतला विकासखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत और पूर्ण दर्शाए गए आवासों की स्थल स्तर पर जांच के साथ-साथ जियो टैग की तकनीकी जांच कराई जाए तो स्थिति स्पष्ट हो सकती है। उनका यह भी आरोप है कि पूर्व में सामने आए मामलों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से संबंधित कर्मचारियों की जवाबदेही तय नहीं हो पा रही है.

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि मौके पर आवास अधूरा है तो सरकारी रिकॉर्ड में उसे पूर्ण किस आधार पर दर्ज किया गया और भुगतान की प्रक्रिया किस स्तर पर सत्यापित की गई। साथ ही, जियो टैगिंग के दौरान अपलोड की गई तस्वीरें संबंधित हितग्राही के वास्तविक आवास की थीं या नहीं, इसकी भी जांच जरूरी बताई जा रही है.

बताया जा रहा है कि मामले से संबंधित दस्तावेज और अन्य कथित जियो टैगिंग मामलों की जानकारी भी सामने लाई जा सकती है। अब निगाहें जनपद पंचायत एवं जिला प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जांच में अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई और सरकारी राशि की वसूली की स्थिति भी बन सकती है.

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