कोरबा।पूरे देश और छत्तीसगढ़ में इन दिनों शारदीय नवरात्रि की धूम है। जहाँ एक ओर गली-मोहल्लों और पण्डालों में आदिशक्ति माँ दुर्गा की प्रतिमाएँ स्थापित कर उनकी पूजा-अर्चना की जा रही है, वहीं कोरबा जिले के ग्राम पंचायत नवागांव कला से एक बेहद अनोखी और हैरान कर देने वाली परंपरा सामने आई है। यहाँ नवरात्रि के पावन पर्व पर दुर्गा माता की मूर्ति स्थापित करने के बजाय, प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश जी को विराजमान किया जाता है। और विघ्नहर्ता के सामने रास गरबा डांडिया खेला जाता है, इस विशेष आयोजन को देखने भारी संख्या में लोग पहुँचते हैं। आसपास के इलाकों में यह गाँव अपनी इस विशिष्ट और अनूठी परंपरा के लिए कौतूहल का विषय बना हुआ है.
क्या है इसके पीछे की वजह?
ग्रामीणों और बुजुर्गों के अनुसार, यह परंपरा बरसों पुरानी है और गाँव की सुख-शांति तथा समृद्धि से जुड़ी हुई है। गाँव के लोगों का मानना है कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से होती है। इसी आस्था के चलते, इस गाँव में नवरात्रि के दौरान भी विघ्नहर्ता गणेश जी की ही विशेष प्रतिमा स्थापित की जाती है। नवरात्रि के पूरे नौ दिनों तक यहाँ माता दुर्गा के नौ रूपों के ध्यान के साथ-साथ भगवान गणेश की विशेष आरती और कीर्तन भजन के साथ पूजा-अर्चना की जाती है.
भक्ति और उल्लास का माहौल
नवागांव कला में इस अनोखे उत्सव को देखने के लिए आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी लोग पहुँच रहे हैं। पण्डाल को भव्य रूप से सजाया गया है। स्थानीय महिला समिति, युवाओं और ग्राम पंचायत के सहयोग से आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में रात को जसगीत और भजनों का दौर भी चलता है, जिसमें माता रानी के साथ-साथ गजानन के जयकारे गूंजते हैं.
गाँव के जागरूक नागरिकों का कहना है कि यह परंपरा हमारे पूर्वजों के समय से चली आ रही है और हम आज भी अपनी इस अनूठी संस्कृति को संजोए हुए हैं.
जहाँ बाकी जगहों पर गणेश उत्सव और नवरात्रि अलग-अलग मनाए जाते हैं, वहीं नवागांव कला में नवरात्रि के भीतर ही दोनों देव शक्तियों का एक अद्भुत संगम देखने को मिलता है.