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पाली विकास के नाम पर खाली: ग्राम पंचायत मादन के खाल्हे पारा में 10 लाख की सीसी रोड में भारी भ्रष्टाचार, कब जागेगा प्रशासन?

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आकाशवाणी.इन

पाली (कोरबा)। विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच पाली विकासखण्ड में धरातल पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। क्षेत्र में विकास के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग का एक बड़ा मामला सामने आया है। ताजा मामला विकासखण्ड पाली के अंतर्गत ग्राम पंचायत मादन के खाल्हे पारा का है, जहाँ नवनिर्मित सीसी (सिमेंट कंक्रीट) रोड निर्माण में भारी भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग के गंभीर आरोप लग रहे हैं. 

यह पूरा मामला 10 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत हुई 300 मीटर सीसी रोड निर्माण से जुड़ा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि खाल्हे पारा की यह सड़क बनते ही टूटने लगी है, जिससे सरकारी बजट का खुलेआम बंदरबांट साफ नजर आ रहा है। इस कार्य की देखरेख और तकनीकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी विभागीय तकनीकी अमले की थी, लेकिन यहाँ तो भ्रष्टाचार का एक बड़ा गठजोड़ सामने आ रहा है.

बिना मौके पर जाए दफ्तर से ही खेल: इंजीनियर और SDO की मिलीभगत उजागर

ग्रामीणों ने इस पूरे मामले में तकनीकी अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का साफ कहना है कि इंजीनियर हेमंत भूषण धरिया और एसडीओ (SDO) बाबूलाल की आपसी मिलीभगत से यह पूरा खेल खेला गया है.

दफ्तर से ही मूल्यांकन: आरोप है कि इंजीनियर और एसडीओ कभी मौके पर काम देखने (Site Inspection) नहीं गए। उन्होंने दफ्तर में बैठकर ही सड़क का फर्जी मूल्यांकन और सत्यापन (Evaluation & Verification) कर दिया.

लाखों की राशि का दुरुपयोग: 10 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि स्वीकृत होने के बावजूद सड़क की मोटाई तय गाइडलाइंस से काफी कम रखी गई है, क्योंकि अधिकारियों ने काम की कोई जमीनी मॉनिटरिंग ही नहीं की.
जनता के पैसे की बर्बादी: अधिकारियों की इस घोर लापरवाही के कारण जनता के टैक्स का पैसा पूरी तरह पानी में बह गया है और पूरी राशि ठिकाने लगा दी गई है.

पहली ही परीक्षा में fail हुई सड़क, गिट्टियां आ रही बाहर

खाल्हे पारा के ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि महज 300 मीटर की इस सड़क में तकनीकी मानकों की जमकर धज्जियां उड़ाई गई हैं। सड़क निर्माण में न तो सही अनुपात में सीमेंट का उपयोग किया गया और न ही इसकी उचित ढंग से क्यूरिंग (तराई) की गई। परिणाम यह है कि उद्घाटन से पहले ही पूरी सड़क पर बड़ी-बड़ी दरारें आ चुकी हैं और गिट्टियां बाहर निकल रही हैं.

ग्रामीणों में भारी आक्रोश, 23 अक्टूबर को कलेक्टर को सौंपा गया ज्ञापन

सड़क निर्माण में हुई इस खुली धांधली को लेकर खाल्हे पारा के ग्रामीणों का आक्रोश सातवें आसमान पर है। भ्रष्टाचार की शिकायत और दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर ग्रामीणों ने एकजुट होकर 23 अक्टूबर को जिला कलेक्टर को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन के माध्यम से ग्रामीणों ने पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने और फर्जी सत्यापन करने वाले अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवई की मांग की है. 

जनता का सवाल: आखिर कब होगी कार्रवाई?

कलेक्टर को ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अब क्षेत्र की जनता सीधे जनपद पंचायत पाली और जिला प्रशासन के उच्च अधिकारियों से त्वरित एक्शन की उम्मीद कर रही है। लोगों का सवाल है कि 10 लाख के बजट को ठिकाने लगाने और मौके पर जाए बिना ही घर बैठे सत्यापन करने वाले इंजीनियर हेमंत भूषण धारिया और SDO पर कड़ी कार्रवाई का होगी? क्या शासन स्तर पर इन दोनो अधिकारियों के खिलाफ कोई निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच बैठाई जाएगी या हर बार की तरह इस बार भी भ्रष्टाचार की इस फाइल को ठंडे बस्ते में दबा दिया जायेगा?

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