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मवेशी तस्करी का भंडाफोड़: पाली के भदरापारा जंगल में बंधक बनाए गए थे 28 बैल; क्रूरता की हदें पार, भूखे-प्यासे पेड़ से बांधकर रखा था

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आकाशवाणी.इन

कोरबा, 17 मई 2026/ जिले के ग्रामीण अंचलों में मवेशी तस्करी का बड़ा भंडाफोड़ हुआ है। पाली थाना अंतर्गत ग्राम भदरापारा के जंगलों में बड़े पैमाने पर गो-वंश तस्करी और क्रूरता के मामले में पशु तस्कर पकड़े गए हैं। सजग ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस ने जंगल में पेड़ों से बांधकर रखे गए 28 नग कीमती बैलों को तस्करों के चंगुल से मुक्त कराया है। इन मवेशियों को बिना चारा-पानी के भूखा-प्यासा बांधकर रखा गया था.

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माना जा रहा है कि बैलों को कत्लखाने ले जाने की तैयारी थी
पाली थाना में दर्ज अपराध क्रमांक 14/2026 के अनुसार पाली टावर मोहल्ला निवासी विजय नेताम (23 वर्ष) जो कि सेवा तहसील प्रचारक के रूप में कार्यरत हैं, को 14 मई 2026 को ग्राम बतरा के आश्रित ग्राम भदरापारा के ग्रामीणों से पुख्ता सूचना मिली थी। ग्रामीणों ने बताया कि जंगल के भीतर कुछ बाहरी संदिग्ध लोग मवेशियों को इकट्ठा कर छिपा रहे हैं.

सूचना मिलते ही विजय नेताम अन्य ग्रामीणों और सहयोगियों के साथ भदरापारा के जंगल पहुंचे। ग्रामीणों की भारी भीड़ को आते देख कुछ मवेशी तस्कर मौके से भाग खड़े हुए, मुख्य आरोपी रहमद खान के साथ 4 अन्य पकड़े गए। जंगल के भीतर का नजारा बेहद विचलित करने वाला था। तस्करों ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए कुल 28 नग बैलों को रस्सी से पेड़ों में जकड़ रखा था। भीषण गर्मी के इस मौसम में मवेशी तड़प रहे थे और उनके पास न तो चारे की व्यवस्था थी और न ही पानी की। इन मवेशियों की अनुमानित कीमत लगभग 84,000 रुपये आंकी गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पाली पुलिस ने शिकायतकर्ता विजय नेताम की लिखित रिपोर्ट पर त्वरित कार्रवाई की है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम 2004 की धारा 4, 6, 10 तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत अपराध क्रमांक 14/2026 दर्ज कर लिया है। कुछ तस्करों के खिलाफ कार्यवाही भी की गई.

आरोपी रहमद खान, अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़े हो सकते हैं तार
ग्रामीणों ने जब मौके पर मुआयना किया तो वहां मौजूद कुछ संदिग्धों से पूछताछ में एक आरोपी का नाम ‘रहमद खान’ सामने आया है। इसके साथ ही 4 अन्य लोग भी पकड़े गए। पुलिस को आशंका है कि इस तस्करी के तार अंतरराज्यीय मवेशी तस्कर गिरोह से जुड़े हो सकते हैं, जो ग्रामीण इलाकों से सीधे-साधे किसानों के मवेशियों को औने-पौने दामों में खरीदकर या चोरी कर जंगलों के रास्ते अन्य राज्यों के कत्लखानों में खपाते हैं.

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सोशल मीडिया पर गाली-गलौच और धमकी का दौर
इस मामले का एक और खौफनाक पहलू सामने आया है। मवेशी तस्करी का भंडाफोड़ करने वाले और तस्करों को पकड़वाने वाले स्थानीय ग्रामीणों को अब निशाना बनाया जा रहा है। मुख्य आरोपी के परिजनों और समर्थकों द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मवेशी पकड़वाने वाले स्थानीय युवाओं व ग्रामीणों को सरेआम गाली-गलौच की जा रही है और धमकियां दी जा रही हैं। इस घटना के बाद से क्षेत्र के सजग नागरिकों में असुरक्षा का माहौल है। ग्रामीणों ने मांग की है कि पुलिस सोशल मीडिया पर धमकी देने वालों पर तुरंत आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज करे और छोड़े गए संदिग्धों की भूमिका की भी री-इन्वेस्टिगेशन हो.

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