VIDEO: कोरबा में आबकारी पस्त बिचौलिए मस्त : ट्रांसपोर्ट नगर दुकान में स्टॉक खत्म, ठीक सामने ₹40 महंगी बिक रही ब्लैक में शराब; वार्ड 51, के रामनगर, जेलगांव चौक और प्रेमनगर भी बने अवैध गढ़!
कोरबा, 06 जून 2026/ट्रांसपोर्ट नगर स्थित सरकारी देशी शराब दुकान के ठीक सामने इन दिनों अवैध शराब की मंडी सज रही है। दुकान के भीतर से स्टॉक गायब है, लेकिन दुकान की दहलीज पार करते ही बाहर शराब का स्टॉक उपलब्ध है। शराब प्रेमियों की मजबूरी का फायदा उठाकर बिचौलिए और माफिया खुलेआम प्रति पव्वा 30 से 40 रुपये अतिरिक्त वसूल रहे हैं.
बिना डर के चल रहा अवैध धंधा
चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा खेल पुलिस और आबकारी विभाग की नाक के नीचे चल रहा है। दुकान के सामने खड़े होकर कुछ असामाजिक तत्व थैलों में शराब रखकर ग्राहकों को आवाज दे रहे हैं। प्रिंट रेट से ज्यादा दाम मांगने का विरोध करने पर ग्राहकों से अभद्रता की जाती है। सूत्रों का कहना है कि दुकान के कर्मचारी ही पिछले दरवाजे से स्टॉक इन कोचियों (अवैध विक्रेताओं) को सप्लाई कर देते हैं, ताकि बाहर ऊंचे दामों पर बेचकर तगड़ा मुनाफा कमाया जा सके.
औद्योगिक नगरी कोरबा में अवैध शराब का कारोबार अब सिर्फ मुख्य सरकारी दुकानों के सामने तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह रिहायशी इलाकों की गलियों तक फैल चुका है। ताजा मामलों के अनुसार, नगर निगम के वार्ड नंबर 51 स्याहीमुड़ी रामनगर, जेलगांव चौक और प्रेमनगर जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्र अवैध शराब बिक्री के बड़े केंद्र बन चुके हैं। इन इलाकों में बेखौफ कोचिए (अवैध विक्रेता) बिना किसी डर के मनमाने दामों पर शराब खपा रहे हैं.
आबकारी विभाग पर उठ रहे सवाल
नियमों के मुताबिक तय कीमत से ₹1 भी ज्यादा लेना अपराध है, लेकिन यहाँ खुलेआम ₹40 तक की ओवररेटिंग हो रही है। दुकान में स्टॉक न होने की बात कहकर ग्राहकों को लौटाया जाता है, जिससे मजबूरन उन्हें बाहर से महंगी शराब खरीदनी पड़ रही है। इस अवैध धंधे से शासन को राजस्व का नुकसान हो रहा है, जबकि माफिया की जेबें गरम हो रही हैं.
प्रशासन और आबकारी विभाग के दावों की पोल खोलने के लिए कोरबा के ट्रांसपोर्ट नगर की यह शराब दुकान ही काफी है। यहाँ खेल बेहद शातिराना है. शराब प्रेमियों को सरकारी काउंटर पर शराब नहीं मिलती, वहां स्टॉक खत्म होने का बोर्ड नजर आता है। लेकिन जैसे ही आप दुकान के ठीक सामने नजर दौड़ाएंगे, आपको अवैध कोचिए और कालाबाजारी करने वाले लोग मिल जाएंगे, जो तय कीमत से 30 से 40 रुपए महंगे दाम पर धड़ल्ले से देसी शराब बेच रहे हैं। काउंटर की शराब बाहर ब्लैक में कैसे पहुँच रही है, इसका जवाब देने वाला कोई नहीं है.
अब देखना यह है कि इस समाचार के बाद आबकारी अमला और स्थानीय पुलिस इन अवैध फड़बाजों पर क्या कार्रवाई करती है.