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कोरबा, 08 जुलाई 2026/ आदि शक्ति की आराधना का नौ दिवसीय पर्व गुप्त नवरात्रि इस वर्ष 15 जुलाई से प्रारंभ होकर 23 जुलाई तक मनाया जाएगा। इस बार गुप्त नवरात्रि का विशेष महत्व इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि पूरे पर्व के दौरान सर्वार्थ सिद्धि योग, त्रिपुष्कर योग और रवि योग जैसे दुर्लभ एवं शुभ संयोग बन रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इन योगों में किए गए जप, तप, पूजा, हवन और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का कई गुना अधिक पुण्यफल प्राप्त होता है.
पं. दशरथनंदन द्विवेदी ने बताया कि गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ पुष्य नक्षत्र, हर्षण योग और वज्र योग में होगा, जो अत्यंत दुर्लभ संयोग है। द्वितीया तिथि पर सिद्धि योग, सप्तमी पर शिव योग, अष्टमी पर सिद्ध योग, नवमी पर सांध्य योग तथा दशमी पर शुभ एवं शुक्ल योग का संयोग रहेगा। उन्होंने बताया कि पहले दिन पड़ने वाली मनोरथ द्वितीया के कारण श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होने की विशेष मान्यता है.
इस दौरान 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा भी निकलेगी। ऐसे में शहर में एक ओर भगवान जगन्नाथ की पूजा-अर्चना होगी तो दूसरी ओर श्रद्धालु आदि शक्ति की दस महाविद्याओं की आराधना और साधना में लीन रहेंगे.
सर्वमंगला और भवानी मंदिर में विशेष तैयारियां
मां सर्वमंगला मंदिर के पुरोहित नमन कुमार पाण्डेय ने बताया कि श्रद्धालुओं द्वारा प्रज्वलित किए जाने वाले मनोकामना ज्योति कलश के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। वहीं दर्री रोड स्थित मां भवानी मंदिर में भी गुप्त नवरात्रि के आयोजन और विशेष पूजन-अर्चना की तैयारियां शुरू हो गई हैं.
पहले दिन बनेंगे कई शुभ संयोग
गुप्त नवरात्रि के पहले दिन ब्रह्म योग दोपहर 3:19 बजे तक रहेगा, जिसे धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-पाठ और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसी दिन अंगारक योग का भी प्रभाव रहेगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार राहु धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, जिससे कई राशियों के जातकों के जीवन में महत्वपूर्ण परिवर्तन के संकेत हैं। इसके अलावा पूरे दिन पूर्वाषाढ़ नक्षत्र रहेगा, जिसके अधिष्ठाता जल के देवता माने जाते हैं। वर्षा ऋतु के आरंभ में इस नक्षत्र का संयोग कृषि, पर्यावरण और प्राकृतिक संतुलन के लिए भी शुभ माना गया है.