आकाशवाणी.इन
कोरबा, 06 सितम्बर 2026/ झीरम घाटी नरसंहार मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत द्वारा 10 आरोपियों को दोषी ठहराए जाने के बाद कांग्रेस ने फैसले को “आधा-अधूरा न्याय” करार देते हुए जांच की दिशा और प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने कहा कि अदालत ने NIA के सामने रखे गए तथ्यों के आधार पर फैसला दिया है, लेकिन घटना के पीछे कथित राजनीतिक साजिश के पहलुओं की जांच अब भी नहीं हुई है.
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से जारी बिंदुओं में कहा गया है कि 23 मई 2013 को झीरम घाटी में हुए नरसंहार में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं सहित 32 लोगों की हत्या हुई थी। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि हमले में घायल और जीवित बचे लोगों के बयान तक समय पर दर्ज नहीं किए गए। कई प्रभावित लोगों ने जांच एजेंसी के समक्ष शपथपत्र के साथ उपस्थित होकर अपने बयान देने की कोशिश की, लेकिन उनके बयान जांच में शामिल नहीं किए गए.
कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि हत्या के कई सप्ताह बाद भी मृतकों और घायलों के पर्स, फाइलें तथा महत्वपूर्ण दस्तावेज घटनास्थल पर पड़े रहे और कई मामलों में मोबाइल फोन तक जब्त नहीं किए गए। पार्टी ने पूछा कि तत्कालीन सरकार, गृह विभाग, मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और नक्सल ऑपरेशन से जुड़े अधिकारियों से NIA ने कब पूछताछ की.
कांग्रेस के अनुसार, NIA की शुरुआती FIR में दो प्रमुख नक्सली नेताओं गणपति (मुप्पला लक्ष्मण राव) और रमन्ना के नाम शामिल थे। 21 मार्च 2014 को गणपति और रमन्ना सहित 26 फरार आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए थे। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि बाद में चार्जशीट में इन नामों को क्यों हटा दिया गया.
पार्टी ने दावा किया कि अगस्त 2014 तक सूची में शामिल कुछ नाम बाद में सितंबर 2014 में अदालत के समक्ष प्रस्तुत प्रारंभिक तथा अंतिम चार्जशीट में नहीं रहे। कांग्रेस ने इसे लेकर पूछा कि संबंधित आरोपियों के नाम हटाने का कारण क्या था.
बड़े नक्सली नेताओं से पूछताछ क्यों नहीं?
कांग्रेस ने कहा कि NIA की शुरुआती जांच में झीरम हमले से जुड़े कई बड़े नक्सली नेताओं के नाम सामने आए थे। पार्टी ने सवाल उठाया कि देवा उर्फ बारसे सुक्का, जिसे NIA की जांच में झीरम में शामिल नक्सलियों में बताया गया था और जिस पर इनाम भी घोषित था, उससे पूछताछ क्यों नहीं की गई.
कांग्रेस ने आत्मसमर्पण करने वाले कई नक्सलियों का भी उल्लेख किया है। इनमें चैतू उर्फ श्याम दादा, रमेश उर्फ मोल्ला राजिरेड्डी, निम्बा उर्फ सुमित्रा और भूपति उर्फ सोनू दादा सहित अन्य नाम शामिल हैं। पार्टी ने सवाल उठाया कि ऐसे लोगों से झीरम हमले को लेकर पूछताछ क्यों नहीं की गई और क्या NIA ने उन्हें इस मामले में निर्दोष मान लिया था.
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि घटना के समय और उसके बाद भी सरकार तथा नक्सलियों के बीच सांठगांठ के आरोप सामने आते रहे, लेकिन जांच एजेंसी ने इस पहलू की पर्याप्त पड़ताल नहीं की। पार्टी ने कहा कि झीरम हमले की पूरी साजिश का पर्दाफाश तभी होगा, जब हमले की योजना, सुरक्षा व्यवस्था में चूक और राजनीतिक षड्यंत्र से जुड़े सभी पहलुओं की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच हो.
गौरतलब है कि 5 सितंबर 2026 को जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने 2013 के झीरम घाटी हमले के मामले में 10 आरोपियों को दोषी ठहराया है। हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं सहित बड़ी संख्या में लोग मारे गए थे। अदालत ने दोषियों की सजा सुनाने के लिए 16 सितंबर की तारीख तय की है.
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