‘भगवान को आजमाने से पहले भक्त को दिखाना होगा अपना पुरुषार्थ’—नवरात्रि की महाअष्टमी पर हाथ में श्रीफल लेकर पथर्रीपारा से कर नापते खाटू श्याम मंदिर निकले कारपेंटर गोपाल विश्वकर्मा
कोरबा, 19 अक्टूबर 2026/आस्था जब चरम पर होती है, तो कठिन से कठिन मार्ग भी सुगम हो जाता है। कुछ ऐसा ही नजारा कोरबा में देखने को मिला, रविवार को जहाँ शारदीय नवरात्रि की महाअष्टमी के पावन दिन बाबा श्याम के प्रति अनन्य भक्ति का परिचय देते हुए पेशे से कारपेंटर (बढ़ई) गोपाल विश्वकर्मा अपने हाथों में पवित्र नारियल (श्रीफल) लेकर कर (दंडवत) नापते हुए बाबा के दरबार की ओर बढ़ते जा रहे थे। वह कोरबा के पथर्रीपारा से लगभग 4 किलोमीटर दूर स्थित मिशन रोड के श्री खाटू श्याम मंदिर में बाबा के दर्शन के लिए इस बेहद कठिन साधना यात्रा पर निकले। महाअष्टमी के पावन अवसर पर एक साधारण कामकाजी व्यक्ति की यह असाधारण और श्रद्धापूर्ण यात्रा पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है.
परीक्षा भगवान की नहीं,अपनी भक्ति की
अपनी इस कठिन और अनूठी यात्रा के दौरान कारपेंटर गोपाल विश्वकर्मा ने भक्ति और कर्म के अंतर्संबंध को लेकर एक बेहद गहरा संदेश दिया। उन्होंने कहा, “भगवान को आजमाने से पहले भक्त को दिखाना होगा कि वह क्या कर सकता है.” जो मन्नत मांगी थी उसको मेरे खाटू बाबा श्याम ही धीरे धीरे पुरा करेंगे.
दिन-रात मेहनत कर लकड़ी को सुंदर आकार देने वाले गोपाल जी का मानना है कि केवल चमत्कारों की उम्मीद में हाथ पर हाथ धरे बैठे रहने के बजाय, भक्त को पहले अपनी निष्ठा, अटूट विश्वास और कड़े पुरुषार्थ को साबित करना चाहिए। जब भक्त अपना सर्वस्व और सर्वश्रेष्ठ प्रयास हाथ में श्रीफल लेकर ईश्वर के चरणों में समर्पित कर देता है, तो ‘हारे का सहारा’ बाबा श्याम खुद आगे बढ़कर उसका हाथ थाम लेते हैं.
महाअष्टमी पर पथर्रीपारा से मिशन रोड तक कर नापते (दंडवत) यात्रा
नवरात्रि की महाअष्टमी के कारण पहले से ही शहर का माहौल भक्तिमय था, और ऐसे में हाथों में श्रीफल थामे पथर्रीपारा से शुरू होकर मिशन रोड स्थित खाटू श्याम मंदिर की ओर कर नापते हुए बढ़ रहे गोपाल विश्वकर्मा कर्मठ कारपेंटर भाई को भक्ति के इस कठिन मार्ग पर संकल्पित देखकर हर कोई हैरान थे, और उनकी सराहना कर रहे थे. मार्ग में कई लोग उनके इस जज्बे को नमन करते रहे.
श्रद्धालुओं का कहना है कि आज के दौर में जहाँ लोग बहुत जल्द हिम्मत हार जाते हैं, वहीं गोपाल जी की यह यात्रा सिखाती है कि यदि संकल्प दृढ़ हो और ईश्वर पर अटूट विश्वास हो, तो कोई भी राह नामुमकिन नहीं है। पथर्रीपारा से मिशन रोड तक की यह दूरी भले ही 4 किलोमीटर की हो, लेकिन तपती धूप में बनियान पहने डामर सड़क पर इस तरह महाअष्टमी के दिन कर नापते हुए इसे पूरा करना एक महान तपस्या के समान है.