Home छत्तीसगढ़ सुशासन में सख्ती: अचानक रेत चोरी के मामलों में आई कम

सुशासन में सख्ती: अचानक रेत चोरी के मामलों में आई कम

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आकाशवाणी.इन

कोरबा, 03 मई 2026/ रेत चोरी के लिए कुख्यात कोरबा जिले में अचानक ऐसे मामलों में अप्रत्याशित रूप से कमी आई है। हसदेव, अहिरन, तान और सोन नदी से रोजाना बड़ी मात्रा में होने वाली रेत चोरी करने वाला वर्ग मजबूरी में शांत हुआ है या उस पर सख्ती हुई है। सुशासन अभियान केदार में यह अपने आप में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
कोरबा शहर के मुख्य मार्ग से होकर चोरी की रेत के साथ सुबह से रात तक दौडऩे वाले ट्रैक्टर और हाईवा नजर नहीं आ रहे हैं। बालको नगर और दूसरे इलाकों में भी इस मामले में कमी आने पर हर कोई गौर कर रहा है कि आखिर ऐसा क्या हो गया। लंबे समय से क्षेत्र की जीवन दायिनी कहीं जाने वाली नदियों से व्यापक पैमाने पर रेत खनन और ट्रांसपोर्टेशन के मामले निर्वाध रूप से जारी थे.

खबर के अनुसार राज्य सरकार के फ्लैगशिप कार्यक्रम में शामिल सुशासन अभियान की शुरुआत के साथ अवैध गतिविधियां कम हुई है या कुछ समय के लिए इस पर ब्रेक लग गया है। कोरबा जिला मुख्यालय के कोरबा जिला मुख्यालय से नजदीक सर्वमंगला नगर में सबसे अधिक रेत चोरी पार्षद के संरक्षण में लंबे समय से जारी है। उसकी देखा देखी और भी लोग इस काम में लग गए है। कई मौकों पर कार्यवाही की बात हुई, यह काम चल रहा है। प्रगति नगर नदियाखार दर्री के साथ-साथ धवईपुर, तरदा और बालको नगर के चुईया से लेकर कटघोरा और बांकीमोंगरा समेत पोड़ीउपरोड़ा का इलाका रेत चोरी के लिए कुख्यात है। माइनिंग और प्रशासन की कार्यवाही इन क्षेत्रों में हुई जरूर लेकिन पूरी तरह से तस्करों पर रोक नहीं लग सकी। हाल में ही सरकार ने कहा था कि अगर कहीं भी रेत चोरी के मामले सामने आते हैं तो इसके लिए कलेक्टर जिम्मेदार होंगे। इसलिए कोरबा समेत विभिन्न क्षेत्रों में रेत चोरी को सख्ती से रोक दिया गया है। खबरों के अनुसार तस्करों को भी लग रहा है कि इस निर्देश के बाद अगर वे अपने लोगों या गाडिय़ों को नदियों में चोरी के लिए उतारते हैं तो इसकी बड़ी कीमत अदा करनी पड़ेगी और फिर इसकी भरपायी करना मुश्किल होगा.

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