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खाद की समस्या हल नही हुई तो…आम आदमी पार्टी किसानों के साथ मिलकर सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगी : आनंद सिंह

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आकाशवाणी.इन

रायपुर/ कोरबा/ 02 सितंबर 2025/ छत्तीसगढ़ प्रदेश के विभिन्न जिलों व तहसील स्तर पर खाद की किल्लत और कलाबाजरी से किसानो को परेशानी हो रही है, प्रदेश मे अन्नदाता की दयनीय स्थिति को लेकर आम आदमी पार्टी ने सरकार के खिलाफ प्रदेश भर मे धरना प्रदर्शन कर समस्या निदान के लिए ज्ञापन सौपां है.

राजधानी सहित कोरबा विधानसभा के करतला, कटघोरा, सहित विभिन्न स्थानों मे धरना प्रदर्शन किया गया। खाद  समस्या को लेकर मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौपा गया. आम आदमी पार्टी के प्रदेश संगठन मंत्री आनंद सिंह ने यह आरोप लगाते हुए कलेक्टर जनदर्शन में ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में कहा है कि कृत्रिम कमी दिखाकर किसानों को निजी विक्रेताओं से यूरिया खरीदने के लिए जानबूझकर मजबूर किया जा रहा है। ताकि निजी विक्रेताओं को लाभ पहुंचाकर उनसे मोटा कमीशन लिया जा सके। यदि आवश्यक यूरिया की आपूर्ति अगले कुछ दिनों में नहीं की गयी तो फसल की पैदावार की कमी आएगी और कर्ज लेकर खेती करने वाले किसान आत्महत्या को मजबूर हो जाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी। आम आदमी पार्टी ने जिले में यूरिया की कमी से किसानों को हो रही इन परेशानियों पर सरकार का विरोध करती है और यदि जल्द ही सरकार ने किसानों की परेशानियां दूर नहीं की तो आम आदमी पार्टी किसानों के साथ मिलकर सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगी. आप जिला अध्यक्ष ग्रामीण जगलाल राठिया ने कहा कि आधा खरीफ सीजन गुजर जाने के बाद भी राज्य में दुनिया की कभी किसानों के लिए चिंताजनक है। इस बार सरकार समय पर डीएचे खाद भी उपलब्ध नहीं करा पाई है। इसी के खिलाफ आम आदमी पार्टी द्वारा भरना प्रदर्शन किया गया। उन्होंने कहा कि आजको भूरिया और खाद की कमी हुई है इसमें सरकार की नाकामी है। कृषि विभाग ने पुरिया और खाद को आपूर्ति के लिए कोई योजना नहीं गई थी। प्रदेश के कुछ जगहों पर परेशान किसानों द्वारा आत्महत्या करने की भी कोशिश की गई है, लेकिन सरकार को नहीं है। छतीसगढ़ में खरीफ सीजन के लिए किसानों ने करीब 1200 करोड़ रुपए का कर्ज लेकर धान और अन्य फसलों की जैसे जैसे खाद की कमी के बावजूद बीआई की है, लेकिन सही समय पर यूरिया की कमी से उनकी मुश्किलें बढ़ गई है। कोरबा लोकसभा अध्यक्ष प्रतिमा सिन्ना ने कहा कि बारिश के समय में यूरिया की अनुपलब्धता से फसल उत्पादन पर असर पड़ने का भी खतरा मंडरा रहा है। अब तक किसानों की जरूरत का आधा या उससे भी कम यूरिया मिल पाया है। जिससे उनकी मेहनत और लागतर संकट छाया हुआ है। छत्तीसगढ़ की कृषि विभाग द्वारा सभी में पूरिया का पति भंडारण नहीं किया जा सका। इसलिए आज किसानों को 266 रुपए में मिलने वाला यूरिया 1200 में लेना पड़ रहा है और पहले 1350 रुपए प्रति वाली डीएपी को 2200 रुपए में निजी विक्रेताओं से मजबूरी में खरीदना पड़ा था। पूरिया की किल्लत और कालाबाजारी से राज्य के किसान परेशान हैं.

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